आइए हम सब मिलकर दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाएं!

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 इरशाद अली

तीन दिन बाद दिल्ली को गैस चैम्बर बनने से रोकने केलिए दिल्ली सरकार की खास पहल अमल में आने वाली है।

लेकिन इससे पहले कि सरकार अपने इस प्रयोग को अमली जामा पहनाएं, विरोधियों ने अपनी तलवारें चमका ली है। उन्होंने परिणाम आए बिना ही केवल विरोध करने भर के लिये अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है।

जरूरी नहीं कि सरकार का ये कदम सफल ही हो लेकिन 15 दिनों के प्रयोग बिना ही आप विरोध-विरोध कैसे चिल्ला सकते है?

जबकि आप जानते हैं कि आपका परिवार और दिल्ली का हर बाशिन्दा इस समस्या से जुझ रहा है। हम जानते है कि दिल्ली भारत के प्रमुख प्रदूषित शहरों में से एक है।

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न्यायालय इस ओर हमारा ध्यान दिला चुका है, अब अगर ऐसे में सरकार इस पर कदम उठाती है तो हम विरोध का बाजा बजाने लगते है।

समस्या सरकार की इस पहल को लेकर नहीं है बल्कि विरोधी दल द्वारा किसी भी बात का खंडन करना अब शायद लोकतंत्र का स्थायी अंग बन गया है। जबकि सरकार इस पहल के प्रति बेहद लचीला रूख अपनाए हुए है। वे केवल 15 दिनों के ट्रायल पर अभी इसे ले रही है और दूसरी जरूरी सेवाएं जो इससे प्रभावित हो सकती है उन्हें इससे अछूता रखा गया है।

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तो सरकार तो खुद इस तरह से अपने प्लान को अंजाम देना चाहती है जिससे कि कम से कम लोगों को इससे परेशानी हो और बेहतर परिणाम हमें मिल सकें।

क्या आप जानते है कि दिल्ली का प्रदूषण लेवल इतना बढ़ गया है कि एक सेहतमंद आदमी अगर दिल्ली की सड़कों पर घूम ले तो उसको इतना नुकसान होगा जितना कि किसी आदमी को 30 सिगरेट पीने से होता है।

अब आप ही सोचिये हमारे बच्चे जो रोज सुबह स्कूल जाते है क्या वो इससे प्रभावित नहीं होगें और हम खुद एक अंजान जहर रोज अपनी सांसों के साथ अपने शरीर को दे रहे है जिसका सीधा असर हमारी उम्र पर पड़ेगा।

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अगर हम 70 साल तक जीने वाले है तो ऐसे माहौल में 50 साल में ही अपना टिकट कटा लेगें। इसलिये हमें विरोध की राजनीति से बचकर देश के लिये और दिल्ली के लिये सोचना चाहिए। स्वच्छ हवा पर हम सबका हक है। दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल को राजनीति के तौर पर देखना ना सिर्फ हमारी अदूरदर्शिता को दर्शाता है बल्कि विकसित भारत की राह में एक बड़ा रोड़ा भी बनेगा।

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